छह साल की छोटी सी उम्र में ही नोआह में बीमारी के लक्षण दिखने लगे थे। इन घावों और दर्द का कारण न जानने के 12 साल बाद आखिरकार ECD का निदान हुआ। नोआह को जो कुछ भी झेलना पड़ा, उसके बावजूद उसने एक चैरिटी के ज़रिए दूसरों की मदद करने का तरीका ढूँढ़ निकाला, जिसने उसके जैसे दूसरे बच्चों की मदद की। नोआह अब ECD खिलाफ़ लड़ाई में अपने साथियों को एक संदेश भी देता है, “हार मत मानो, लड़ते रहो। उनके पास अब जो उपचार हैं, वे काम करते हैं और आपके जीवन में बदलाव लाएँगे। सवाल पूछने से न डरें। अपने लिए खड़े हों।”